अगर आप किसी micro या small बिज़नेस से माल खरीदते हैं और देर से भुगतान करते हैं, तो उस खरीद पर income-tax छूट जा सकती है और सप्लायर को भारी ब्याज भी देना पड़ सकता है। जिस नियम को लोग "Section 43B(h)" कहते हैं, वह 1 अप्रैल 2026 को ख़त्म नहीं हुआ — वह नए Income-tax Act, 2025 में Section 37(2)(g) बन गया।
मुख्य बात: Micro और small सप्लायर को माल/सेवा स्वीकार करने के 15 दिन में भुगतान करें, या लिखित समझौता हो तो तय अवधि में, जो ज़्यादा से ज़्यादा 45 दिन हो सकती है। इस सीमा के बाद बचा भुगतान उसी tax year में घटेगा जिसमें आप असल में चुकाएँगे।
प्रमाण तालिका: नियम के पीछे का कानून
| प्रावधान | क्या कहता है |
|---|---|
| Income-tax Act, 2025 — Sec 37(2)(g) | MSMED Act की Sec 15 की समय-सीमा के बाद micro या small enterprise को देय रकम की छूट तभी मिलेगी जब भुगतान हो। (पहले: Income-tax Act 1961 की Sec 43B(h), FY 2023-24 से।) |
| Sec 37(3) | "Return की due date से पहले चुका दो" वाली सामान्य राहत clause (g) पर लागू नहीं। |
| MSMED Act, 2006 — Sec 15 | तय तारीख तक भुगतान, जो स्वीकार करने से 45 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकती। लिखित समझौता नहीं: 15 दिन। |
| MSMED Act — Sec 16 | देर पर RBI Bank Rate का 3 गुना, मासिक चक्रवृद्धि ब्याज। |
| MSMED Act — Sec 23 | यह ब्याज income tax में घटाया नहीं जा सकता। |
| लागू होने की तारीख | Income-tax Act, 2025 — 1 अप्रैल 2026 से (tax year 2026-27 से)। |
यह नियम किस पर लागू है?
- खरीदार: कोई भी कारोबारी या professional जो खरीद को खर्च के रूप में दिखाता है — चाहे वह खुद MSME हो या नहीं।
- सप्लायर: Udyam पर registered micro या small enterprise। Medium enterprise इसमें नहीं।
- Trader: retail और wholesale trader को Udyam registration सिर्फ़ priority-sector lending के लिए मिलता है (MSME मंत्रालय का memo, 2 जुलाई 2021), इसलिए उनसे खरीद पर यह सुरक्षा आमतौर पर लागू नहीं होती। सप्लायर के Udyam certificate में activity देखें।
- उधार पर खरीदे capital goods खर्च नहीं होते, इसलिए यह नियम मुख्य रूप से स्टॉक, कच्चे माल और सेवाओं पर असर डालता है।
एक उदाहरण
आपकी कपड़ों की दुकान है। 1 फ़रवरी 2027 को आप एक micro manufacturer से 45 दिन के लिखित उधार समझौते पर ₹5,00,000 का कपड़ा स्वीकार करते हैं। सीमा 18 मार्च 2027 को ख़त्म होती है।
| स्थिति | Tax year 2026-27 में छूट | सप्लायर को देय ब्याज |
|---|---|---|
| 15 मार्च 2027 को भुगतान | ₹5,00,000 की छूट मिलेगी | शून्य |
| 31 मार्च 2027 तक बकाया, 15 मई 2027 को भुगतान | ₹0 — ₹5,00,000 tax year 2027-28 में जाएगा | लगभग ₹14,500 (करीब 2 महीने, 17.25%, मासिक चक्रवृद्धि) |
30% टैक्स दर पर देर वाले मामले में 2026-27 में लगभग ₹1.5 लाख ज़्यादा टैक्स देना होगा, ऊपर से करीब ₹14,500 ब्याज जिसे आप घटा भी नहीं सकते। समय पर भुगतान किसी short-term लोन से कहीं सस्ता है।
Return भरने से पहले: आम गलतियाँ
- यह मानना कि "return भरने से पहले चुका दूँगा" तो छूट बच जाएगी। MSME बकाया पर ऐसा नहीं होता।
- Purchase order में 60 या 90 दिन लिखना। कानून 45 पर रोकता है; उससे ज़्यादा को 45 ही माना जाता है।
- सप्लायर से Udyam नंबर न माँगना। इसके बिना पता नहीं चलता कि कौन इस नियम में है।
- आंशिक भुगतान करके बाकी भूल जाना। सीमा के बाद बचा हिस्सा ही रुकेगा, पर रुकेगा ज़रूर।
- कंपनियों का MSME Form I भूलना: अप्रैल–सितंबर का अर्धवार्षिक MCA return 31 अक्टूबर तक देना होता है।
कारोबारियों के लिए प्लेबुक
- सभी सप्लायर से Udyam नंबर लें और देखें कौन micro या small है (और trader नहीं)।
- उधार अवधि लिखित में तय करें — अधिकतम 45 दिन।
- हर हफ़्ते MSME सप्लायर के 30 दिन से पुराने खरीद बिलों की सूची बनाएँ और पहले उन्हें चुकाएँ।
- 31 मार्च से पहले हर वह MSME बिल चुका दें जिसकी सीमा निकल चुकी है।
- MSME बकाया की सूची tax audit report और Form I के लिए अपने CA को दें।
DAM में सप्लायर का बकाया ट्रैक करें
ये steps DAM के in-app search और Reports dashboard से लिए गए हैं।
- Search खोलें और New Purchase टाइप करें, हर सप्लायर बिल उसी तारीख पर दर्ज करें जिस दिन माल स्वीकार किया।
- Reports सर्च करें और All Parties खोलें — हर पार्टी का मौजूदा लेना-देना (receivable/payable) दिखेगा।
- Purchase Invoices सर्च करके तारीख के हिसाब से खरीद रजिस्टर देखें और पुराने बकाया बिल पहचानें।
- भुगतान करते समय Pay Money सर्च करें, सप्लायर चुनें और रकम दर्ज करें ताकि बैलेंस अपडेट हो।
किस सप्लायर का कितना बाकी, एक सूची में
खरीद बिल और भुगतान दर्ज करें ताकि कोई MSME बकाया 45 दिन पार न करे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 2026 में Section 43B(h) अब भी लागू है?
यही नियम tax year 2026-27 से Income-tax Act, 2025 की Section 37(2)(g) के रूप में जारी है। FY 2025-26 और पहले के लिए 1961 Act की Section 43B(h) लागू है।
लिखित समझौता न हो तो?
माल या सेवा स्वीकार करने के 15 दिन में भुगतान करना होगा।
क्या medium enterprise पर भी लागू है?
नहीं। सिर्फ़ micro और small enterprise।
देर से भुगतान पर ब्याज दर क्या है?
RBI Bank Rate का तीन गुना, मासिक चक्रवृद्धि। Bank Rate 5.75% (अक्टूबर 2026) पर यह 17.25% सालाना है।
क्या सप्लायर शिकायत कर सकता है?
हाँ, MSME Samadhaan portal पर, जो मामला राज्य की Micro and Small Enterprises Facilitation Council को भेजता है।
स्रोत
सामग्री 23 अक्टूबर 2026 को जाँची गई। Income-tax Act, 2025, Section 37(2)(g) · Income Tax Department: Act in force from 1 April 2026 · MSMED Act, 2006 (DC-MSME) · MSME Samadhaan।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के लिए है, औपचारिक कर, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। कोई भी कदम उठाने से पहले किसी registered Chartered Accountant (CA) से पुष्टि करें।